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कैंसर के इलाज का फ़ैसला: हर मरीज़ को पूछने चाहिए ये 7 सवाल
ये 7 सवाल मरीज़ों और परिवारों को डॉक्टर से सही बात पूछने और इलाज की योजना को अच्छी तरह समझने में मदद करते हैं।
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: कैंसर का पता चलने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है: कम समय में सही फ़ैसला लेना। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के मौके पर Oncare Cancer Centre ने ऐसे 7 ज़रूरी सवाल साझा किए हैं, जो हर मरीज़ और परिवार को इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछने चाहिए।
सही सवाल पूछना क्यों ज़रूरी है
कई मरीज़ और परिवार डॉक्टर के सामने घबराहट में सवाल पूछना भूल जाते हैं। घर लौटकर मन में कई सवाल आते हैं, पर तब तक इलाज की तैयारी शुरू हो चुकी होती है।
कैंसर का इलाज हर मरीज़ के लिए अलग होता है। यह कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, जाँच की रिपोर्ट और मरीज़ की सेहत पर निर्भर करता है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले पूरी जानकारी होना मरीज़ का हक़ भी है और समझदारी भी।
“जानकारी रखने वाले मरीज़ और परिवार इलाज के हर क़दम पर ज़्यादा भरोसे के साथ चल पाते हैं,” Oncare Cancer Centre का कहना है। “इलाज की योजना समझने में कोई सवाल छोटा नहीं होता। हम चाहते हैं कि हर परिवार अपने हर सवाल का जवाब पाकर ही आगे बढ़े।”
हर मरीज़ के लिए 7 ज़रूरी सवाल
ये सवाल उस सलाह पर आधारित हैं जो कैंसर विशेषज्ञ मरीज़ों को आम तौर पर देते हैं। इन्हें अपनी अगली मुलाक़ात में डॉक्टर के पास साथ ले जाएँ।
1. मेरा कैंसर किस प्रकार का है और किस स्टेज पर है?
क्यों पूछें: बायोप्सी और स्कैन की रिपोर्ट से पता चलता है कि कैंसर कहाँ है, कितना फैला है और किस तरह का है। पूरा इलाज इसी जानकारी पर टिका होता है। अपनी सभी रिपोर्ट की एक कॉपी अपने पास ज़रूर रखें। ब्रेस्ट कैंसर के मामले में हार्मोन रिसेप्टर और HER2 की जाँच के नतीजे भी इलाज तय करने में मदद करते हैं।
2. मेरे लिए इलाज के कौन-कौन से विकल्प हैं, और आप यही विकल्प क्यों सुझा रहे हैं?
क्यों पूछें: इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, टार्गेटेड थेरेपी या इनमें से कुछ का मेल हो सकता है। यह भी पूछें कि बाक़ी विकल्प क्यों नहीं चुने गए। इससे आपको योजना पर भरोसा करने में आसानी होगी।
3. इलाज का लक्ष्य क्या है?
क्यों पूछें: लक्ष्य कैंसर को पूरी तरह ख़त्म करना हो सकता है, उसे क़ाबू में रखना हो सकता है, या तकलीफ़ कम करना हो सकता है। लक्ष्य पता हो तो उम्मीदें सही रहती हैं और आगे की तैयारी बेहतर होती है।
4. इलाज से क्या फ़ायदा हो सकता है, और जोखिम व साइड इफ़ेक्ट क्या हैं?
क्यों पूछें: जानें कि इलाज कितने समय चलेगा, रोज़मर्रा की ज़िंदगी, खाने और काम पर क्या असर पड़ सकता है, और किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को बताना है। इलाज से मिलने वाले संभावित फ़ायदे और साइड इफ़ेक्ट, दोनों के बारे में खुलकर पूछें, ताकि आप दोनों को तौलकर फ़ैसला ले सकें।
5. क्या मेरे केस को एक से ज़्यादा विशेषज्ञों ने देखा है?
क्यों पूछें: कई मामलों में सर्जन, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट की राय मिलकर एक बेहतर योजना बनती है। पूछें कि आपके केस पर कौन-कौन से विशेषज्ञ विचार कर रहे हैं।
6. पूरे इलाज का अनुमानित ख़र्च कितना होगा, और बीमा में क्या शामिल है?
क्यों पूछें: जाँच, दवाइयाँ, अस्पताल में भर्ती और फ़ॉलो-अप, सबका अनुमान पहले से जान लें। संभव हो तो लिखित अनुमान माँगें।
7. इलाज के दौरान और बाद में देखभाल कैसे होगी?
क्यों पूछें: पूछें कि फ़ॉलो-अप जाँच कब होंगी, किसी परेशानी में किससे संपर्क करना है, और खान-पान व मानसिक सहारे के लिए क्या मदद उपलब्ध है। कैंसर का सफ़र केवल इलाज तक सीमित नहीं होता। कैंसर काउंसलिंग जैसी मदद भी इस दौरान काम आ सकती है।
दूसरी राय लेना कब समझदारी है
दूसरी राय लेना इलाज में देरी नहीं, बल्कि भरोसे का हिस्सा है। नए निदान के बाद, सर्जरी की सलाह मिलने पर, या अलग-अलग डॉक्टरों की राय अलग होने पर इसके बारे में सोचा जा सकता है।
अपने मौजूदा डॉक्टर को बताकर और सभी रिपोर्ट साथ ले जाकर दूसरी राय लेना ठीक रहता है।
About Oncare Cancer Centre
Oncare Cancer Centre अंग-विशेष कैंसर देखभाल (जैसे हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी) देता है और मरीज़ों को समझने में आसान जानकारी व केयर कोऑर्डिनेशन उपलब्ध कराता है। यह मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के विशेषज्ञों के साथ काम करता है और दूसरी राय की सेवा उपलब्ध कराता है। Oncare के केंद्र बेंगलुरु (राजाजीनगर, व्हाइटफील्ड, कल्याण नगर और बसवनगुड़ी), नोएडा, गुरुग्राम, ग़ाज़ियाबाद, पश्चिम दिल्ली और दक्षिण दिल्ली में हैं।
Economy
पारूल विश्वविद्यालय और गोवा स्वास्थ्य सेवा संचालनालय ने फिजिओथेरपी केंद्र शुरू किए
केपेम (गोवा), 24 अक्टूबर: पारूल विश्वविद्यालय गोवा की स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (डीएचएस), गोवा के साझेदारी के तहत अक्तूबर 2026 में गोवा के पूरे राज्य में फिजिओथेरपी और पुनर्वास केन्द्रों का उनकी सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के साथ शुभारम्भ किया गया| इस गतिविधि का शुभारम्भ मार्गाव के दक्षिण गोवा जिला रुग्णालय के सभागार में हुए शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुआ| पुनर्वास सेवाओं को मजबूती देने के साथ फिजिओथेरपी देखभाल में सुधार करना और गोवा राज्य भर में स्वास्थ्य देखभाल सेवा का विस्तार करना, यह इस पहल का उद्देश्य है|
इस अवसर पर पारूल एज्युकेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. देवांशू पटेल, गोवा सरकार के स्वास्थ्य सचिव श्री. यतीन्द्र एम. मारळकर, गोवा में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. सलीना नाईक और राज्य के स्वास्थ्य देखभाल प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकरी तथा नेता एवम् पारूल विश्वविद्यालय, गोवा के कई शैक्षिक प्रतिनिधि भी सम्मीलित हुए|

इस पहल के तहत फिजिओथेरपी क्लिनिक्स का शुभारंभ मार्गाव के दक्षिण गोवा जिला रुग्णालय में किया गया| साथ ही बाल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और काणकोण में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का भी निर्माण किया गया| इन केन्द्रों में समुदाय के करीब वर्तमान सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में समावेश के द्वारा फिजिओथेरपी और पुनर्वास सेवाएँ दी जाएंगी| इनकी निर्मिति के द्वारा क्षति से ठीक हो रहे, मोबिलिटी की चुनौतियों का सामना करनेवाले तथा काम करने में स्वतन्त्रता और सुधार की आवश्यकता होनेवाले रुग्णों के उपयोग के लिए उचित पुनर्वास सुविधाओं की आवश्यकता अधोरेखित हो जाएगी तथा उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उपयोगी सिद्ध होगी|
इस पहल में नर्सिंग, फिजिओथेरपी और उपयोजित और स्वास्थ्य विज्ञान के पारूल विश्वविद्यालय, गोवा के 350 से अधिक छात्रों ने भी सहभाग लिया| इस शपथ के द्वारा छात्रों ने उनके हर रोज के व्यवहार में, व्यावसायिक निर्णयों में और उन पर विश्वास रखनेवाले हर एक के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की|

इस अवसर पर संवाद करते हुए पारूल एज्युकेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. देवांशू पटेल ने कहा, “जिन लोगों को सबसे अधिक आवश्यकता होती है, उन तक जब स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचती हैं, तभी वह सार्थक होती है| सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में फिजिओथेरपी और पुनर्वास सेवाओं की उपलब्धता बढ़े, इसके लिए हम गोवा के स्वास्थ्य सेवा संचालनालय के साथ काम का रहे हैं| इस
प्रकार ये सेवाएँ स्थानीय समुदायों को आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी| शैक्षिक योग्यत और स्वास्थ्य देखभाल की धरातल की आवश्यकताओं के बीच होनेवाले अन्तराल को दूर करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता इसमें अधोरेखित होती है और सार्थक कार्य द्वारा समाज को सेवा देने के लिए भविष्य में स्वास्थ्य कर्मियों को मंच देने का भी यह प्रयास है|”
इस समारोह में स्वास्थ्य सेवा संचालनालय के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदेश मदाईकर, पीएचसी खोरलिम के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. केदार राईकर, दक्षिण गोवा जिला रुग्णालय के चिकित्सा सुपरइंटेंडंट डॉ. राजेन्द्र बोरकर, पारूल विश्वविद्यालय गोवा के व्हाईस चँसेलर डॉ. ललित लता झा, विशेष दायित्व अधिकारी डॉ. राजेन्द्र देसाई, स्वास्थ्य मंत्रि के सलाहकार मिस. फ्रेझेला डी एरायुजो और डॉ. गीता देशमुख, सीएचसी काणकोण के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जोसे टॅव्हारेस, पीएचसी बाल्ली के चिकित्सा अधिकारी डॉ. बेनेडिटा डायस और पारूल विश्वविद्यालय गोवा के निदेशक, सामान्य प्रशासन अजय यादव भी उपस्थित थे| विश्वविद्यालय के शैक्षिक नेतृत्व का प्रतिनिधित्व पारूल फिजिओथेरपी महाविद्यालय के डीन डॉ. असीम यादव, पारूल कॉलेज ऑफ अलाईड अँड हेल्थ सायन्सेस के डीन डॉ. अनुपम कुमार, पारूल कॉलेज ऑफ नर्सिंग के डीन डॉ. जयालक्ष्मी के और अन्य गणमान्य विद्वान और मान्यवर हस्तियों ने किया|
इस पहल में सहभाग के उनके अनुभव पर छात्रों ने अपने विचार रखे और क्लासरूम के बाहर सीखने का महत्त्व बताया तथा लोगों के जीवन में सुधार के लिए स्वास्थ्य कर्मी जो भुमिका अदा करते हैं, उसके बारे में बात की| “इस पहल का हिस्सा बन कर मै यह जान पायी कि जिन लोगों को आवश्यकता होती है, उन तक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ देना कितना महत्त्वपूर्ण है| लोगों को रिकवर होने में और उनके जीवन में सुधार करने के लिए फिजिओथेरपी और उनर्वास किस तरह अहम होते हैं, इसे समझने का यह अच्छा अवसर और अनुभव था|” ऐसा सानवी मारळकर ने कहा जो फिजिओथेरपी फैकल्टी में पहले वर्ष की छात्रा है|
इस अनुभव के बारे में बात करते हुए, फिजिओथेरपी फैकल्टी के अन्य छात्र शिवराज कोडलकर ने कहा, “करीब से सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली देखने का यह एक अवसर हमें मिला| भविष्य में स्वास्थ्य कर्मी होना सिर्फ रुग्णों पर उपचार करना ही नही है, बल्की उनकी आवश्यकताएँ समझना, साथ काम करना और अधिक लोगों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल उपलब्ध होने में सहायता करना भी है|”

यह शुभारम्भ शिक्षा संस्थान और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राधिकरणों के सहयोग के द्वारा समुदाय आधारित स्वास्थ्य देखभाल को मजबूती देने के पारूल विश्वविद्यालय, गोवा और स्वास्थ्य सेवा संचालनालय की साझी प्रतिबद्धता को दर्शाता है| पुनर्वास को अधिक आसानी से उपलब्ध कराने के लिए इस परियोजना में जिला, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में फिजिओथेरपी क्लिनिक्स खड़े किए जाएंगे तथा पूरे गोवा राज्य में सर्वांगीण रुग्ण देखभाल में फिजिओथेरपी की भुमिका को अधिक मजबूत किया जाएगा|
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